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Friday, April 13, 2018

PM का छत्तीसगढ़ दौरा आज, पहले वेलनेस सेंटर का करेंगे उद्घाटन

PM का छत्तीसगढ़ दौरा आज, पहले वेलनेस सेंटर का करेंगे उद्घाटन

अमेरिका ने सीरिया पर हमला कर दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस के सहयोग से सीरिया के खिलाफ मिसाइल हमले की अनुमति दे दी है. ये हमला बीते हफ्ते सीरियाई कस्बे दूमा में हुए कथित केमिकल अटैक की प्रतिक्रिया के रूप में किया गया है. वहीं, उन्नाव गैंगरेप और जम्मू-कश्मीर के कठुआ में दरिंदगी के बाद 8 साल की बच्ची की हत्या के मामले में पीएम मोदी ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. पीएम ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से देश शर्मसार हुआ है. बेटियों को न्याय मिलकर रहेगा. न्याय देना हमारी सरकार की जिम्मेदारी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज छत्तीसगढ़ के बीजापुर दौरे पर हैं. मोदी यहां देश के पहले वेलनेस सेंटर का उद्घाटन करेंगे. 'आयुष्मान योजना' के तहत इस सेंटर का उद्घाटन किया जा रहा है. इसके अलावा गुरुग्राम में आज विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष पद का चुनाव है. इस चुनाव में प्रवीण तोगड़िया का भविष्य तय होगा.


कठुआ और उन्नाव रेप मामले में पीएम मोदी ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि हम एक देश और समाज के तौर पर हम शर्मसार हैं. बेटियों को इंसाफ मिलेगा. दिल्ली में आंबेडकर मेमोरियल के उद्घाटन के मौके पर पीएम मोदी ने कठुआ और उन्नाव गैंगरेप का जिक्र करते हुए कहा, "पिछले दो दिनों से जिन घटनाओं की चर्चा हो रही है वह किसी सभ्य समाज का हिस्सा नहीं हो सकती है. एक देश, एक समाज के तौर पर हम शर्मसार हैं. मैं पूरे देश को यह विश्वास दिलाना चाहता हूं कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. देश की बेटियों को इंसाफ मिलेगा."

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Saturday, March 31, 2018

वाजपेयी की तरह पाक से बात करे मोदी, जंग में कुछ नहीं रखा- महबूबा मुफ्ती

वाजपेयी की तरह पाक से बात करे मोदी, जंग में कुछ नहीं रखा- महबूबा मुफ्ती

जम्‍मू कश्‍मीर की मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वाजपेयी सरकार की तरह पाकिस्‍तान से बात करनी चाहिए. इसी से दोनों देशों के बीच शांति का रास्‍ता निकलेगा. कश्‍मीरी पंडितों के एक कार्यक्रम में महबूबा ने कहा कि जिस तरह से वाजपेयी ने पाकिस्‍तान के साथ बातचीत की थी वैसे ही मोदी सरकार को भी करना चाहिए. पाकिस्‍तान से कहना चाहिए कि कश्‍मीर में आतंकी भेजना बंद करे. दो के बदले चार मारने की बात होती है लेकिन हमारे बच्चे मर रहे हैं.

उन्‍होंने कहा कि जंग होनी होती तो अटल जी की समय ही हो जाती लेकिन दोनों मुल्क समझते हैं की जंग से कोई समाधान नहीं निकलता है. न तो हम और न पाकिस्‍तान जंग लड़ने की स्थिति में है. दोनों देश जानते हैं कि यदि जंग हुई तो कुछ नहीं बचेगा. दोनों मुल्‍क सब कुछ गंवा देंगे. टेलीविजन पर जो लोग रात को बैठते हैं और कहते हैं कि सबक सिखाएंगे, वो कोई सबक नहीं सिखाया जा रहा है. सबक वहां हमें सिखाया जा रहा है...हमारे लोग मर रहे हैं.

महबूबा ने शांति का समर्थन करते हुए कहा कि जब जंग नहीं होनी है तो दोनों तरफ से रास्ते खुलने चहिये. बातचीत होनी चाहिए. वहां के लोग आ सके, हम वहां जा सकें. सुलह होनी चाहिए. लोगों को दोस्ताना माहौल में रहना चाहिए.

कश्‍मीरी पंडितों की स्थिति पर मुख्‍यमंत्री ने कहा कि कश्मीरी पंडित हमारे हैं और कश्मीर का अहम् हिस्सा हैं. उनसे कहा है कि वे यहां आएं और अपने बच्चों को भेजें. सब उनको (कश्मीरी पंडितों) बहुत याद करते हैं. कश्मीर के लोग भी मिस करते हैं. मैंने कहा है कि सभी तकलीफ दूर करने को तैयार हैं. पंडितों के बिना कश्मीर नामुकम्मल है.

Friday, March 30, 2018

राहुल गांधी की राह में सबसे बड़ी बाधा बन सकती हैं ममता बनर्जी

राहुल गांधी की राह में सबसे बड़ी बाधा बन सकती हैं ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिल्ली आकर जिस तरह विपक्षी नेताओं से ताबड़तोड़ मुलाकातें की हैं, उससे मोदी विरोध को चाहे जितनी हवा और ताकत मिले, यह तय है कि इससे राहुल गांधी की राह में सबसे बड़ी बाधा खड़ी होती नजर आ रही है। चूंकि वे आक्रामक हैं, अपने दम पर पश्चिम बंगाल का लाल गढ़ भेद चुकी हैं, इसलिए अगर उनकी तरफ मोदी विरोधी उम्मीदभरी नजरों से देखने लगे हैं तो हैरत नहीं होनी चाहिए। सत्ता का अपना चरित्र होता है और अपनी मर्यादा भी। राजनीति का विपक्षी तेवर अलग होता है और सत्ता में आते ही उसी शख्सियत का चरित्र बदल जाता है। ऐसा नहीं कि ममता बनर्जी के स्वभाव में सत्ता की वजह से बदलाव नहीं आया है, लेकिन उन्होंने अपना अंदाज नहीं बदला है। अब भी वे संघर्षशील बने और दिखते रहना चाहती हैं।
संघर्ष का अंदाज और औजार
हालांकि सत्ता और वोट की चिंता में उनके संघर्ष का अंदाज और औजार बदला है। इस अंदाज में अल्पसंख्यक तुष्टीकरण भी है और धर्मनिरपेक्षता की कथित चिंता भी। दिल्ली आकर उन्होंने जिस तरह विपक्षी नेताओं से मुलाकातें की हैं, उससे साफ होता है कि विपक्ष भी उनके जरिये बड़ा सपना देख रहा है। ममता बनर्जी का कहना है कि मोदी विरोधी दलों को मिलजुलकर आगामी लोकसभा चुनाव में वन टू वन यानी सीधी टक्कर देनी चाहिए। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और फूलपुर में हुए उपचुनावों में वन टू वन के फार्मूले से मिली विपक्षी जीत को वे उदाहरण के तौर पर पेश कर रही हैं।11996 के आम चुनावों तक कांग्रेस को पटखनी देने के लिए इसी तरह कांग्रेस विरोधी दल अपने-अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में गोलबंदी करते रहे और वन टू वन यानी कांग्रेस को सीधी टक्कर देते रहे।
कांग्रेस को टक्कर
जिस दल का जहां प्रभाव रहा, उसने वहां कांग्रेस को टक्कर दी और बाकी दलों ने उसे सहयोग दिया। ममता उसी को दोहराना चाहती हैं, लेकिन अब इस गोलबंदी के निशाने पर कांग्रेस नहीं, भाजपा है, लेकिन इस वन टू वन के फॉमरूले में एक पेच है। खुद ममता के बंगाल में कांग्रेस और वामपंथी दल शायद ही उनके लिए राह छोड़ें। इसलिए बात अगर नहीं बनी तो निश्चित मानिए, त्रिकोणीय मुकाबले होंगे। यह भाजपा की कामयाबी ही मानी जानी चाहिए, कि जिसे 1996 तक अछूत माना जाता था, उसके खिलाफ अब सभी दलों को एक होने की तैयारी करनी पड़ रही है। ममता के वन टू वन टक्कर में पेच हर राज्य में आएंगे। उत्तर प्रदेश और बिहार में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल कुछ सीटें छोड़ सकते हैं। इसी तरह झारखंड, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में भी कांग्रेस विपक्षी दलों के रहमो-करम पर होगी, लेकिन केरल में उसके सामने चुनौती आएगी।
वाममोर्चा अपनी मौजूदा ताकत को शायद ही नकारे
भाजपा वहां लगातार उभर रही है, लेकिन सत्ताधारी वाममोर्चा अपनी मौजूदा ताकत को शायद ही नकारे और कांग्रेस भी अपनी ताकत से पीछे शायद ही हटे। दोनों कम से कम केरल में यह मानने को तैयार नहीं होंगे कि उनकी ताकत घटी है और वे मिलजुलकर भाजपा को चुनौती देंगे। विवाद तो ओडिशा में भी होगा, जहां केरल की तरह भाजपा उभर रही है, लेकिन सत्ताधारी बीजू जनता दल शायद ही स्वीकार करे कि उसे कांग्रेस के साथ मिलकर भाजपा को चुनौती देनी है।
अभियानों पर भी पैनी निगाह
ममता के इस अभियान के बीच दो और नेताओं के अभियानों पर भी पैनी निगाह रखनी होगी। तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू भी अपने-अपने ढंग से भाजपा विरोधी मोर्चा बना रहे हैं। उन्होंने वन टू वन का फार्मूला नहीं दिया है, लेकिन उनके राज्यों में भाजपा अभी बड़ी ताकत नहीं है, इसलिए वहां कांग्रेस से ही उनका मुकाबला है या फिर कांग्रेस से निकली वाईएसआर कांग्रेस से। इसलिए वहां भी मोदी विरोध के साथ कांग्रेस विरोध का पेच फंसेगा। ममता की यह पूरी कवायद कामयाब होती है तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी को होगा।

Tuesday, March 27, 2018

लोकसभा में 16वें दिन भी हंगामा, गतिरोध दूर करने में जुटीं स्पीकर सुमित्रा महाजन

लोकसभा में 16वें दिन भी हंगामा, गतिरोध दूर करने में जुटीं स्पीकर सुमित्रा महाजन

लोक सभा के गतिरोध को दूर करने की दिशा में कदम उठाते हुए स्पीकर सुमित्रा महाजन ने मंगलवार को अलग-अलग दलों के नेताओं से मुलाकात की। स्पीकर ने यह मुलाकात ऐसे समय की है, जब विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के चलते संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में लोक सभा की कार्यवाही लगातार 16 दिन हंगामे की भेंट चढ़ गयी है।
सूत्रों के मुताबिक, महाजन ने कांग्रेस पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और ज्योतिरादित्य सिंधिया के अलावा अन्नाद्रमुक, शिव सेना, तृणमूल कांग्रेस, वाइएसआर कांग्रेस, टीआरएस और बीजद नेताओं से मुलाकात की। सूत्रों ने कहा कि अगर गतिरोध कायम रहता है तो महाजन सर्वदलीय बैठक बुलाने पर भी विचार कर रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस ने स्पीकर के साथ बैठक में कहा कि सदन में पहले सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की जाए। हालांकि स्पीकर ने उन्हें बताया कि अविश्वास प्रस्तावों की प्राप्ति की सूची में सबसे पहला नोटिस तेलुगू देशम पार्टी की ओर से आया है। दूसरे पर वाइएसआर कांग्रेस का नोटिस है और तीसरे पर कांग्रेस का। स्पीकर ने सदन का गतिरोध दूर करने के लिए संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार से भी विचार विमर्श किया है।
गौरतलब है कि अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला लेने के लिए स्पीकर बाध्य हैं। लेकिन शोर शराबे के कारण इसपर फैसला नहीं लिया जा सका है। वेल में आकर नारेबाजी करने वालों में टीआरएस और अन्नाद्रमुक शामिल हैं। मंगलवार को टीआरएस तो शांत हो गई, लेकिन अन्नाद्रमुक का विरोध जारी रहा और एक मौके पर कांग्रेस के साथ भिड़ंत की स्थिति बन गई।
कर्नाटक चुनाव: 5 चेहरों पर दारोमदार, मोदी-शाह के सामने राहुल और सिद्दारमैया

कर्नाटक चुनाव: 5 चेहरों पर दारोमदार, मोदी-शाह के सामने राहुल और सिद्दारमैया

दिल्ली. कर्नाटक विधानसभा चुनाव की तारीख का एलान हो चुका है। यहां एक बार फिर बीजेपी और कांग्रेस का सीधा मुकाबला है। हालांकि, आप कह सकते हैं कि यहां जनता दल एस की मौजूदगी भी तो है। लेकिन, फिलहाल तो इसका जिक्र ज्यादा नहीं हो रहा है। बहरहाल, इस चुनाव में पांच चेहरे ऐसे हैं जिनका चर्चा में रहना तय है। यहां हम इनके नाम और उनकी जिम्मेदारी आपको बता रहे हैं।
पहले जानिए कि क्या विपक्ष उत्साहित है?
- भाजपा हाल ही में यूपी की दो सीटें में हारी। मायावती हों या अखिलेश यादव या फिर कांग्रेस। सभी कहने लगे कि नरेंद्र मोदी सरकार की लोकप्रियता खत्म हो चुकी है। और जनता केंद्र सरकार से नाराज है। 
बीजेपी ने बदला लिया?
- गोरखपुर और फूलपुर की लोकसभा सीटों पर हार का बदला भाजपा ने राज्यसभा चुनाव में लिया। यूपी की 10 में से 9  सीटें पार्टी ने जीत लीं।
कर्नाटक की 224 सीटों पर 12 मई को वोटिंग, 15 मई को नतीजे; मुकाबला येदियुरप्पा v/s सिद्धारमैया

कर्नाटक में किन पांच चेहरों पर रहेगी नजर?

नरेंद्र मोदी: केंद्र सरकार के चार साल पूरे  होने वाले हैं। मोदी की साख को दांव पर बताया जा रहा है। लेकिन, पंजाब को छोड़ दिया जाए तो भाजपा ज्यादातर राज्यों में चुनाव प्रधानमंत्री के नाम पर ही जीती। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कर्नाटक की 28 में से 17 सीटें जीती थीं। वोट शेयर 42.4% रहा था। 
राहुल गांधी
- गुजरात चुनाव के बाद अपनी इमेज बदलने में कुछ हद तक कामयाब रहे। पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद यह उनका चौथा विधानसभा चुनाव है। इससे पहले उन्होंने त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय में कैम्पेनिंग की थी। हालांकि, कांग्रेस मेघालय में सरकार नहीं बचा पाई थी। कर्नाटक में राहुल मंदिर-मंदिर घूम रहे हैं। 
सिद्धारमैया
- कर्नाटक के मुख्यमंत्री हैं। सरकार बचाने की चुनौती है। भाजपा उन पर करप्शन और हिंदू विरोधी होने का आरोप लगा रही। हालांकि, वो दावा करते हैं कि पिछली बार से भी ज्यादा सीटें जीतेंगे।
अमित शाह
- राज्य में भाजपा को कामयाबी दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। उन्होंने 16 केंद्रीय मंत्रियों, 24 सांसदों समेत 55 लोगों की एक टीम तैयार की है। जिसे मार्च के आखिर तक रिपोर्ट देनी है। शाह ने 16 केंद्रीय मंत्रियों को चार-चार विधानसभा सीटों का जिम्मा दिया है। खुद भी एक महीने में दूसरी बार राज्य के दौरे पर पहुंचे हैं।
बीएस. येदियुरप्पा
- भाजपा के मुख्यमंत्री पद उम्मीदवार हैं। डेढ़ साल में दो बार पूरे कर्नाटक का दौरा कर चुके हैं। लिंगायतों में मजबूत पकड़। उन पर करप्शन के आरोप लग चुके हैं। लेकिन, बीजेपी का सबसे लोकप्रिय चेहरा हैं। इसमें कोई दो राय नहीं।